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उत्तराखंड कैबिनेट में 8 प्रस्तावों को मंजूरी, चिकित्सा शिक्षा से लेकर ग्रीन हाइड्रोजन नीति तक बड़े फैसले

देहरादून। उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में कुल 8 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। बैठक के बाद महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने फैसलों की जानकारी दी।

 

इन निर्णयों का असर चिकित्सा शिक्षा, राजस्व, उद्योग, जनजाति कल्याण, सिंचाई, उच्च शिक्षा, सामरिक हवाई सेवाओं और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा।

 

 

कैबिनेट के प्रमुख फैसले इस प्रकार हैं—

 

चिकित्सा शिक्षा विभाग में कार्यरत स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों को बड़ी राहत दी गई है। अब ऐसे कर्मी जिन्होंने कम से कम 5 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, वे आपसी सहमति से स्थानांतरण कर सकेंगे।

 

राजस्व विभाग में आपसी समझौते से भूमि अर्जन की नई व्यवस्था लागू की गई है, जिससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया सरल और विवादमुक्त होगी।

 

उधम सिंह नगर स्थित पराग फर्म की भूमि, जो पूर्व में सिडकुल को दी गई थी, अब सिडकुल द्वारा सब-लीज पर दी जा सकेगी, जिससे औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।

 

जनजाति कल्याण विभाग में बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए विभाग का पुनर्गठन किया गया है और चार नए जनजाति कल्याण अधिकारियों के पद सृजित किए गए हैं।

 

सिंचाई विभाग में भू-जल उपयोग की नई दरें प्रस्तावित की गई हैं। अब सोसायटी, ग्रुप हाउसिंग और अन्य व्यावसायिक कार्यों के लिए 5 हजार रुपये का अलग से पंजीकरण शुल्क देना होगा।

 

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी विश्वविद्यालयों को बढ़ावा देते हुए जीआरडी कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने का फैसला लिया गया है।

 

सामरिक हवाई सेवाओं से जुड़े अहम निर्णय के तहत गोचर और चियालीसौंड हवाई पट्टियों को लेकर अब राज्य सरकार और रक्षा मंत्रालय संयुक्त रूप से निर्णय लेंगे।

 

ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत राज्य की हरित नीति को मंजूरी दी गई है। इस नीति में दी जाने वाली सब्सिडी के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे।

कैबिनेट के ये फैसले राज्य में प्रशासनिक सुधार, औद्योगिक निवेश, पर्यावरण संरक्षण और आधारभूत ढांचे के विकास को नई दिशा देने वाले माने जा रहे हैं।

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