ग्रीन लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान : संतुलित व सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र से सशक्त समुदाय-आजीविका तीन दिवसीय अंतरराज्यीय कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न

ग्रीन लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान : संतुलित व सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र से सशक्त समुदाय-आजीविका तीन दिवसीय अंतरराज्यीय कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न
ऋषिकेश, 28 अगस्त 2025
उत्तराखंड के ऋषिकेश में 26 से 28 अगस्त 2025 तक आयोजित अंतरराज्यीय कार्यशाला “ग्रीन लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान : संतुलित व सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र से सशक्त समुदाय-आजीविका” सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस कार्यशाला ने विभिन्न राज्यों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को साझा मंच प्रदान कर जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, कृषि और आजीविका संतुलन जैसे मुद्दों पर ठोस रणनीतियों को आकार दिया।
कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि दिलीप जावलकर (IAS), सचिव जलागम, उत्तराखंड एवं परियोजना निदेशक हिमांशु खुराना (IAS) की उपस्थिति और सक्रिय सहभागिता से हुआ।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में जावलकर ने कहा कि “ग्रीन-एजी परियोजना कृषि और पर्यावरण के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य कर रही है। आज जलवायु परिवर्तन तेजी से बढ़ रहा है, जैव विविधता घट रही है और भूमि का क्षरण बढ़ रहा है। ऐसे समय में वास्तविक कार्य ‘लैंडस्केप’ स्तर पर ही संभव है। यदि पाँचों राज्यों में यह प्रयास सफल होते हैं तो भारत सफल होगा और भारत सफल होगा तो पूरी दुनिया इसे देखेगी।” उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक परिदृश्य भिन्न होते हुए भी चुनौतियाँ समान हैं – जीविकोपार्जन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना।
जावलकर ने उत्तराखंड में हुए प्रयासों का विशेष उल्लेख करते हुए फार्मर फील्ड स्कूल अंतर्गत जैविक इनपुट प्रशिक्षण, इको क्लब की स्थापना से पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न प्रयासों का अंगीकरण, महिला कृषक समूहों को स्थानीय जैवविविधता के विवेकपूर्ण व सतत् उपयोग आधारित वैल्यू चेन पर कौशल विकास उपलब्ध कराना इत्यादि जैसे प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने जलागम मंत्री सतपाल महाराज के दिशा निर्देशन में हो रहे जलागम कार्यों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए अपने संबोधन का समापन एक प्रेरणादायी हिंदी कविता के साथ किया। ग्रीन-एजी परियोजना को “कृषि और पर्यावरण के बीच सेतु” बताते हुए लैंडस्केप स्तर पर सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
उक्त कार्यशाला ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी (जेफ), फ़ूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाईजेशन ऑफ़ द यूनाइटेड नेशंस (एफ ए ओ) के रीजनल एशिया पसिफ़िक मुख्यालय, बैंकॉक, से समीर कार्की (जेफ तकनीकी अधिकारी), सुश्री शायला वर्टज़ (वरिष्ठ वानिकी अधिकारी), सुश्री एक्सेल बूले (वानिकी अधिकारी), ग्रीन एजी राष्ट्रीय परियोजना प्रबंधन इकाई से कोंडा रेड्डी (असिस्टेंट एफ ए ओ रिप्रेजेन्टेटिव); मनोज मिश्रा (राष्ट्रीय तकनीकी समन्वयक), डॉ ए.के. डिमरी, संयुक्त निदेशक, एन एस बर्फाल, उप निदेशक, तथा डॉ. डी.एस. रावत, उप निदेशक जलागम विभाग ने कार्यशाला के आयोजन में अपना योगदान दिया |
कार्यशाला में मंच का संचालन डॉ रावत एवं राज्य तकनीकी समन्वयक द्वारा किया गया। कार्यशाला से पूर्व प्रतिभागियों ने राजाजी-कार्बेट लैंडस्केप के ग्रामों का फील्ड विज़िट कर लैंटाना उन्मूलन, चैनलिंक फेंसिंग, जियोमेंबरन टैंक, ड्राई स्टोन चेकडैम व परती भूमि विकास जैसे हस्तक्षेपों का अवलोकन किया और समुदाय के साथ संवाद किया।
अगले तीन दिनों में विशेषज्ञ प्रस्तुतियाँ, समूह चर्चा और अनुभव साझा करने के सत्रों के माध्यम से ग्रीन लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान के विभिन्न पहलुओं पर गहन विमर्श हुआ।
इस कार्यशाला में के प्रतिनिधियों सहित ग्रीन-एजी राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय विशेषज्ञों तथा मिजोरम, उड़ीसा, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड के अधिकारियों ने भागीदारी की।
ग्रीन-एजी परियोजना ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी (GEF) द्वारा वित्तपोषित, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित तथा फ़ूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाईजेशन (FAO) के सहयोग से लागू की जा रही है।
उत्तराखंड में इसका क्रियान्वयन जलागम निदेशालय के नेतृत्व में पौड़ी जनपद के चयनित ब्लॉकों में हो रहा है।
यह तीन दिवसीय कार्यशाला सभी प्रतिभागियों के लिए एक सीखने और साझा अनुभवों का मंच बनी, जो भविष्य में समुदाय आधारित आजीविका व पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध होगी।