उत्तराखंड

सड़क सुरक्षा की अनूठी पहल; चालकों के स्वास्थ्य व सामाजिक-आर्थिक अध्ययन से दुर्घटनाओं पर नियंत्रण का अभिनव प्रयास

सड़क सुरक्षा की अनूठी पहल; चालकों के स्वास्थ्य व सामाजिक-आर्थिक अध्ययन से दुर्घटनाओं पर नियंत्रण का अभिनव प्रयास

टिहरी गढ़वाल/मुनिकीरेती।

पर्वतीय एवं मैदानी मार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने के उद्देश्य से टिहरी जनपद में संचालित विशेष अभियान का आज, 15 अक्टूबर 2026 को विधिवत समापन हो गया। जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल के दिशा-निर्देशों के क्रम में परिवहन विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस ऑन-रोड समग्र स्वास्थ्य परीक्षण एवं सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण शिविर ने सड़क सुरक्षा को एक नया वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रदान किया है।

अभियान की रूपरेखा एवं ऑन-रोड क्रियान्वयन

21 सितंबर से 15 अक्टूबर 2026 तक जनपद के विभिन्न क्षेत्रों तपोवन, देवप्रयाग, कानाताल, जाख ढालवाला, मुनिकीरेती एवं भद्रकाली में चालकों एवं परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं सामाजिक अर्थिक सर्वेक्षण किया गया. जिसके अंतिम चरण में 13 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2026 मुनिकीरेती क्षेत्र स्थित गंगा वाटिका मुख्य द्वार एवं भद्रकाली तिराहा जैसे रणनीतिक स्थानों पर मोबाइल यूनिट के माध्यम से यह शिविर आयोजित किया गया। अभियान के अंतिम चरण में मुख्य रूप से व्यावसायिक वाहन चालकों—विशेषकर ऑटो, विक्रम, ई-रिक्शा, स्कूल बस/वैन एवं मालवाहक वाहनों के चालकों एवं परिचालकों—को लक्षित किया गया।

मार्ग पर चलते वाहनों के चालकों का तत्परता से स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ-साथ उनके रहन-सहन, काम के घंटे, विश्राम की स्थिति, पारिवारिक पृष्ठभूमि व आर्थिक दशाओं से संबंधित विस्तृत सामाजिक-आर्थिक डेटा संकलित किया गया।

संयुक्त परिवहन आयुक्त द्वारा स्थलीय अनुश्रवण एवं सराहना

अभियान के समापन अवसर पर संयुक्त परिवहन आयुक्त, उत्तराखण्ड, राजीव मेहरा स्वयं भद्रकाली तिराहे पर उपस्थित रहे। उन्होंने ऑन-रोड संचालित स्वास्थ्य परीक्षण एवं सर्वेक्षण कार्य का स्थलीय निरीक्षण व अनुश्रवण किया।

मेहरा ने इस नवाचार की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रायः सड़क सुरक्षा अभियानों में केवल प्रवर्तन (चालान) और तकनीकी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित रहता है, किंतु चालकों के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य और उनकी सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को सीधे दुर्घटनाओं के कारणों से जोड़कर देखना एक अत्यंत संवेदनशील व दूरगामी पहल है।

उन्होंने इस अनूठे एवं जनहितकारी कार्य के लिए सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय (प्रवर्तन), टिहरी के एआरटीओ ज्योति शंकर मिश्र एवं उनकी संपूर्ण टीम की कार्यशैली व समर्पण की मुक्तकंठ से सराहना की।

डेटा संकलन और दुर्घटना विश्लेषण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

संयुक्त परिवहन आयुक्त ने निर्देश दिए कि शिविर के दौरान संकलित चालक-परिचालक के संपूर्ण डेटा का गहन विश्लेषण किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

स्वास्थ्य एवं दृष्टि दोष: लंबी ड्यूटी, अनिद्रा, तनाव, रक्तचाप तथा दृष्टि संबंधी कमियों का त्वरित उपचार दुर्घटनाओं की संभावना को प्राथमिक स्तर पर ही समाप्त करता है।

सामाजिक-आर्थिक कारकों का अध्ययन: आर्थिक दबाव, काम के अनियमित घंटे और सामाजिक सुरक्षा का अभाव चालक की एकाग्रता को प्रभावित करते हैं। इन कारकों का सड़क दुर्घटनाओं से अंतर्निहित संबंधों का वैज्ञानिक अध्ययन नीति-निर्माण और भविष्य की कार्ययोजनाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

टीम भावना एवं जनसहयोग;

परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग (उप जिला चिकित्सालय नरेन्द्रनगर) और स्थानीय प्रशासन के परस्पर समन्वय से यह अभियान पूर्णतः सफल रहा। जनसामान्य व पर्यटकों के आवागमन को बाधित किए बिना सुचारु रूप से संपन्न हुए इस शिविर को स्थानीय वाहन यूनियनों एवं चालकों ने भी सराहा।

यह अभियान इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब नियम-प्रवर्तन के साथ मानवीय संवेदना और वैज्ञानिक अनुसंधान का समावेश होता है, तो सड़क सुरक्षा मात्र एक औपचारिकता न रहकर ‘जीवन रक्षा’ का वास्तविक माध्यम बन जाती है।

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